सारांश
एक धूसरे रंग वाले आसमान के नीचे एक दोपहर में, ईशा शर्मा अपने पड़ोस के सुपरमार्केट में हमेशा की तरह खरीदारी कर रही थीं। उन्होंने अपनी टोकरी में जरूरत से ज्यादा सामान भर रखा था और तय नहीं कर पा रही थीं कि क्या ख़रीदा जाए। तभी, पीछे से एक कोमल आवाज़ आई, "क्या हम इसे आधा-आधा बाँटेंगे?" मुड़कर देखने पर, उन्होंने पाया कि हरी वर्मा मुस्कुराते हुए खड़े थे। थोड़ी सी उलझन के साथ, लेकिन मन हल्का हो जाने पर, ईशा शर्मा ने संदेह में भी उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
उस दिन से, दोनों ने रोटी, फल और कभी-कभी रोजमर्रा की वस्तुएँ भी आधे-आधे बाँटने की अजीब आदत अपना ली। उन्हें लगता था कि किसी भी छोटी चीज़ को आधे करने से उनके बीच की दूरी कम हो जाती है। बातचीत में साझा किए गए रहस्य और बीते दिनों की छाया भी, जैसे सावधानी से आधे हिस्सों में बाँटी जा रही हों, उनके बीच एक कोमल बंधन को जन्म दे रही थीं।
एक दिन, उनका ध्यान एक छोटे तोते की देखभाल की ओर गया। दोनों ने बारी-बारी से अपने प्रिय पक्षी की देखभाल करने का निर्णय लिया। पर जिस तोते को उन्होंने अपनाना शुरू किया था, वह साधारण नहीं था। उसकी पंखों की चमक में एक अनियमितता थी और वह दोनों की आवाज़ों की नक़ल करने की अजीब क्षमता रखता था। शुरुआत में उसकी प्यारी अदाओं पर दोनों हँसते थे, लेकिन धीरे-धीरे तोते के व्यवहार में एक रहस्यमय असर दिखने लगा।
एक सुबह, जब ईशा शर्मा हमेशा की तरह तोते की देखभाल कर रही थीं, अचानक तोते ने खुद पिंजरे का दरवाज़ा खोल दिया और जोरदार उड़ान भरते हुए निकल गया। ईशा शर्मा और हरी वर्मा ने घबराहट में उसकी तलाश शुरू की और आखिरकार खरीदारी वाले क्षेत्र के एक कोने में स्थित पुराने मंदिर के प्रांगण में उसे पकड़ लिया। वहाँ, एक अजीब पत्थर की मूर्ति सामने थी, जिस पर केवल आधी नक्काशी की गई थी, साथ ही एक नाजुक कागज का टुकड़ा भी रखा था। उस पर लिखा था, "सब कुछ आधे होकर एक हो जाता है। तुम्हारा भी ऐसा समय आएगा।"
इस चौंकाने वाली घटना से सदमे में आकर, दोनों ने अब तक अपनाई गई "आधा बाँटना" की प्रक्रिया का अर्थ पुनः सोचना शुरू किया। क्या वे वस्तुएँ आधे-आधे बाँटकर वास्तव में अलगाव नहीं, बल्कि सच्ची एकता के संकेत को संजोए हुए थे? ईशा शर्मा और हरी वर्मा ने अपने इस पुराने रिवाज का पुनर्मूल्यांकन करते हुए, अब तक छिपी हुई सभी भावनाओं और यादों को बिना किसी हिचकिचाहट के साझा करने का दृढ़ निश्चय कर लिया।
उसी क्षण, पीछे से हल्की पंखों की झंकार सुनाई दी। मुड़ कर देखने पर पाया कि उड़ता हुआ तोता वापस आ गया था – वही तोता जो पहले भाग गया था। इस बार, बिना किसी अनिच्छा के, वह दोनों की बाहों में लौट आया। तोते का यह आगमन कोई साधारण संयोग नहीं था, बल्कि उन्हें दिया गया आख़िरी संकेत था। इस प्रकार, ईशा शर्मा और हरी वर्मा ने अपने-अपने आधे हिस्सों को मिलाकर एक सम्पूर्णता की ओर बढ़ने का नया कदम उठाया। यह अजीब और गर्मजोशी भरी कहानी उस क्षण शांति से समाप्त हो गई, जब उनके दिल पूरी तरह एक हो गए थे।

















































