सारांश
कहानी एक शांत ग्रीष्मकालीन रात से शुरू होती है। हाईस्कूल की छात्रा नताशा शर्मा, अपने छोटे भाई के कमरे में पड़ी एक पुरानी फ्लॉपी डिस्क में अनेक रहस्यमयी अफवाहें पढ़ लेती है। उत्सुकता और शरारत की भावना से प्रेरित होकर, नताशा डिस्क पर एक पंक्ति जोड़ देती है: 'रात के पार्क में अकेले लड़के अर्जुन वर्मा के साथ खेलोगी तो तुम वापस नहीं आ पाओगी।'
यह अफवाह तुरंत शहर भर में फैल जाती है, और शुरुआत में इसे मजाक में उड़ा दिया जाता है। लेकिन कुछ ही रातों में, पार्क के आसपास अजीब सी आवाजें सुनाई देने लगती हैं, और अचानक किसी परछाई जैसी लड़के की आकृति दिखाई देती है। शहर के लोग धीरे-धीरे चिंता और भय में डूबने लगते हैं, और अफवाहें वास्तविक घटनाओं के रूप में चर्चा का विषय बन जाती हैं।
एक चांदनी रात, सच्चाई जानने की चाह में, नताशा अकेले ही पार्क में पहुंच जाती है। ठंडी हवा में पेड़ों के बीच झूलों के पास, एक फीकी सी उजली आभा लिए लड़के - अर्जुन वर्मा - ने ऐसा प्रतीत कराया मानो वह नताशा से कुछ कहना चाहता हो। उसने धीरे से कहा, 'तुम्हारी बनाई हुई अफवाह... सचमुच में सच बन गई है,' और पल भर में वह रात के अंधेरे में खो गया।
उसी क्षण, नताशा पर एक बर्फ जैसी सिहरन छा जाती है, और अगली ही पल वह खुद पार्क के अंधेरे में समा जाती है। अगले दिन सुबह, उसकी कोई झलक नहीं मिलती, और शहर में केवल यह डरावनी कथा बच जाती है कि नताशा उस अफवाह की शिकार बन गई थी।
और आज भी, रात के पार्क में, हवा के संग 'अब तुम इससे बच नहीं पाओगे...' की फुसफुसाहट सुनाई देती है, मानो अर्जुन वर्मा की अफवाह नए शिकारों की प्रतीक्षा करती हो।

















































