सारांश
राहुल वर्मा आज भी अपने अधीनस्थों के साथ अपनी उपलब्धियों की शान में डूबे हुए थे। अपने भव्य सफलता पर गर्व करते हुए, वह काम से लौटते समय टैक्सी में सवार थे और एक रेडियो से प्रसारित हो रहे जीवंत जायंट मैच से उनका मन आनंदित हो उठा। नियति का पल - जब महत्वपूर्ण तीसरा गेंद उनके सामने था, पिन्च हिटर के बल्लेबाज़ी बॉक्स में प्रवेश करने का दृश्य प्रसारित हुआ, और कमेंटेटर ने उत्साह में जयकार की। लेकिन उसी क्षण, टैक्सी अंधकार में प्रवेश कर गई और रेडियो की आवाज एक पल में गायब हो गई। भ्रम और चिंता के बीच, अचानक चालक ने धीरे से कहा, "पिन्च हिटर ने हिट नहीं मारी है, लेकिन आपने जो अभी यह घटना देखी है, वही आपके स्वयं के घमंड पर ध्यान देने का मोड़ है।" इस एक शब्द से, राहुल वर्मा ने गहराई से महसूस किया कि अब तक उनकी शान और गर्व कितने क्षणभंगुर और निरर्थक थे। जब टैक्सी सुरंग से बाहर निकल कर फिर से रोशनी में प्रकट हुई, तो उनके दिल में अचानक गर्म पछतावे के साथ एक नई दृढ़ संकल्प की अनुभूति हुई। उन्होंने फुसफुसाते हुए पूछा, "क्या पिन्च हिटर ने हिट मारी?" उत्तर पहले ही स्पष्ट है। पिन्च हिटर ने हिट नहीं मारी - परंतु आज रात की घटना ने उनके स्वयं के दिल में सच्ची सफलता की छाप छोड़ी।

















































