सारांश
गर्मियों के अंत में, जब धूसर बादल मंडरा रहे थे, कक्षा 6-2 का कमरा भारी और उदास वातावरण से घिरा हुआ था। छात्र उदासीनता और थकान में, बस समय के गुजर जाने का इंतजार कर रहे थे। रीमा भी, जिनके कभी सपनों की चमक थी, वह मंद पड़ गई थीं, और वे केवल रोजाना की कक्षाएं ले रही थीं।
स्कूल के बाद, एक शांत कक्षा के कोने में, कुछ अनजान छात्र अचानक प्रकट हो गए। वे किसी नए या बहिष्कृत छात्र नहीं थे, बल्कि उनमें एक अद्भुत रहस्यमय चमक थी, जैसे वे समय की एक दरार से प्रकट हुए हों। छात्र उनके आगमन पर हैरान थे, लेकिन अचानक ही उनके दिल में गर्माहट की धड़कन उठी।
जैसे-जैसे रोजाना की बातचीत बढ़ी, रीमा ने उनके द्वारा सुनाए गए अजीब किस्सों में – कभी के सपनों और भूले-बिसरे जुनून के टुकड़ों में – अपने दिल में दबे हुए युवा दिनों की चमक फिर से महसूस की।
एक शाम, स्कूल के पुराने भंडार में, रीमा ने धूल चढ़े एक फोटो एलबम की खोज की, और उसमें अपनी मुस्कान तथा जीवंत छात्रों की छवियाँ देखकर चकित रह गईं।
उसी क्षण रीमा ने समझ लिया कि ये रहस्यमय छात्र उनके अतीत की बची हुई जुनून तथा खोए हुए सपनों के प्रतीक थे। कक्षा में यह अप्रत्याशित मुलाकात उनके पुनर्जीवन का निमंत्रण थी, और अलविदा कहते हुए एक नई शुरुआत की रस्म भी थी।
अंतिम कक्षा समाप्त होते ही, कक्षा की खिड़की पर झलकते छात्र, मानो मंद रोशनी में पिघलते एक भ्रम की तरह, धीरे-धीरे गायब हो गए। रीमा एक मुस्कान के साथ उस रहस्यमय मुलाकात के लिए आभार व्यक्त करती हुई, अपने अतीत से हमेशा के लिए विदा लेते हुए, नए भविष्य की ओर पहला कदम बढ़ा दीं।

















































