सारांश
डॉ. आरव ने अपनी मंगेतर प्रियंका के साथ नया जीवन शुरू करने के सपने में, एक शांत देहाती शहर के पुराने घर में कदम रखा। शिफ्टिंग की पहली रात, सुबह जागते ही उन्हें पूरे घर में सड़ते हुए लाश की तरह गंध महसूस हुई। आरव ने सहन नहीं कर सके और खुशबू फैलाने का प्रयास किया, लेकिन उस भारी माहौल से छुटकारा नहीं मिला। निराश होकर, उन्होंने पड़ोसियों से सुना कि 'इस घर में एक अजीब व्यक्ति, रमेश, रहते थे।' एक दिन, सफाई करते समय, जब उन्होंने आलमारी खोली, तो उन्हें धूल से ढकी एक पुरानी शादी की अंगूठी मिली। वह अंगूठी मंद चमक के साथ दुख और पीड़ा का एहसास कराती थी, मानो किसी अतीत के प्रेम का निशान हो। जिज्ञासा में डूबे आरव ने घर के हर कोने की तलाशी ली और एक छिपे हुए कमरे की खोज की। उस कमरे में रमेश की डायरी और पुरानी तस्वीरें बिखरी पायीं, जिनसे यह प्रकट हुआ कि उसने कभी गहरी मोहब्बत की थी और एक दुर्घटना में अपनी मंगेतर को खो दिया था। लेकिन जांच के दौरान आरव को एक और चौंकाने वाला सत्य सामने आया। असल में, मंगेतर प्रियंका कुछ साल पहले एक दुर्घटना में अपनी जान गंवा चुकी थी, और उसका भूत इस घर में भटक रहा था। दु:ख और पागलपन में, रमेश ने मर चुकी प्रियंका के प्रति अपनी अटूट यादों में एक श्राप जैसा अनुष्ठान किया था और उसके प्रेम का प्रतीक स्वरूप अंगूठी छुपा दी थी। अंततः, आरव को यह एहसास हुआ कि उसका सदैव संजोया गया भविष्य, वास्तव में उस महिला के भूत से जुड़ा हुआ भाग्य था, जो पहले ही इस दुनिया से विदा हो चुकी थी। भय और निराशा में डूबे हुए, वह उस शाप और अतीत की त्रासदी से कभी मुक्ति नहीं पाता, और अपने जीवन भर उसी घर में बंधा रहा।

















































