सारांश
छोटे नायक और बड़े दुश्मन
किसी समय की बात है, एक गाँव में एक छोटा लड़का, तارو, रहता था। वह जिज्ञासु स्वभाव का था और हमेशा गाँव के कोनों की खोजबीन करता रहता था। एक दिन, जब तارو जंगल के गहरे हिस्सों में खोजबीन कर रहा था, उसे एक अप्रत्याशित दृश्य का सामना करना पड़ा। एक विशाल दुश्मन, गाँव का महत्वपूर्ण भोजन चुरा रहा था! तARO ने चौंककर खड़ा हो गया, लेकिन उसके मन में यह सोच आया कि यह नायक बनने का अवसर है।
तARO ने साहस जुटाया और गाँव की ओर दौड़ पड़ा। "सभी लोग, दुश्मन भोजन चुरा रहा है!" उसने चिल्लाया। लेकिन गाँव के बड़े लोग उसकी बात पर विश्वास नहीं कर रहे थे। "तARO, तुम जो कह रहे हो वह सच में बहुत बढ़ा-चढ़ा कर कहा गया है। बड़ा दुश्मन तो हो ही नहीं सकता।" उन्होंने हंसते हुए कहा। लेकिन तARO ने हार नहीं मानी, और उसने खुद से दुश्मन का सामना करने का फैसला किया।
रात हुई, और तARO ने फिर से उस जंगल की ओर बढ़ा दिया जहां दुश्मन था। उसने छोटे पत्थर और लकड़ी की छड़ी लेकर, धीरे-धीरे दुश्मन के पास गया। फिर उसे दुश्मन को भोजन चुराते हुए देखा। तARO ने अपने दिल की धड़कन को महसूस करते हुए, साहस जुटाकर एक पत्थर फेंका। "हे, दुश्मन! वहाँ का भोजन गाँव का है!" उसने चिल्लाया। दुश्मन ने चौंककर पलटा और तARO की छोटी सी कद-काठी पर हंस पड़ा।
लेकिन तभी, तARO ने देखा कि दुश्मन का ध्यान आकर्षित होते ही, गाँव के बड़े लोग पीछे से आ गए। सभी ने मिलकर दुश्मन को घेर लिया। "तARO की बात सच थी!" बड़े लोग चकित रह गए। अंततः, दुश्मन को पकड़ लिया गया, और गाँव को लौटाया गया भोजन सुरक्षित रहा। गाँव वालों ने छोटे तARO की बहादुरी की प्रशंसा की, और "बच्चे की मुट्ठी को मोड़ने" की तरह, उन्होंने जाना कि उसकी ताकत कभी भी छोटी नहीं होती। तARO ने छोटे नायक के रूप में, गाँव में नई आशा लाई।






































































































































































































