सारांश
दुसरी दुनिया की लाइब्रेरी
समय भविष्य का था, और पृथ्वी के किसी कोने में "समय की लाइब्रेरी" नामक एक रहस्यमय जगह मौजूद थी। इस लाइब्रेरी में अतीत, वर्तमान और भविष्य का सभी ज्ञान भरा हुआ था। लेकिन वहां तक पहुँचने वाले केवल चुने हुए लड़के-लड़की ही होते थे। उन्हें "शिक्षालय के बच्चे" कहा जाता था, और उनका एक विशेष मिशन होता था।
एक दिन, एक अकेला लड़का ताकेरु रहस्यमय रोशनी के पीछे-पीछे लाइब्रेरी में प्रवेश करता है। वहां ऐसे किताबें भरी हुई हैं, जिन्हें उसने पहले कभी नहीं देखा था, और धुंध में ज्ञान वाले आत्माएँ व्यस्तता से इधर-उधर घूम रही थीं। ताकेरु उस स्थान से अभिभूत होता है, लेकिन किसी कारणवश एक किताब उठाता है। वह "भविष्य की किस्मत बदलने का तरीका" शीर्षक वाली किताब थी।
जब वह किताब खोलता है, तो ताकेरु के सामने भविष्य का चित्र उभरता है। उसके चारों ओर लोग कठिनाइयों का सामना करते हुए और दुखी होते हुए दिखाई देते हैं। ताकेरु महसूस करता है कि उसकी अज्ञानता उन्हें दुख दे रही है। तब वह लाइब्रेरी की आत्माओं से मदद मांगता है और ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लेता है। प्रत्येक दिन, वह विभिन्न क्षेत्रों की किताबों को पढ़ता है, और कभी-कभी आत्माओं के साथ चर्चाएँ करता है और बढ़ता है।
समय बिता, ताकेरु ने अद्वितीय विकास किया और ज्ञान अर्जित किया। अंततः उसने लाइब्रेरी के दरवाजे को ढूंढ लिया और वास्तविक दुनिया में लौटने का निश्चय किया। जहाँ वह लौटा, वहाँ लोग उसकी सीखी हुई बातें उपयोग में लेकर मदद मांग रहे थे। ताकेरु अपने बल पर उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ता है, और "लड़का अगर न सीखे तो बुढ़ापे में न जाने" के सिख को अपने दिल में रखकर, भविष्य में उजाला फैलाता है।






































































































































































































