सारांश
सोने वाली राजकुमारी और नगर का रोमांच
बहुत समय पहले, एक छोटे से नगर में "सोने वाली राजकुमारी" नाम की एक लड़की थी। वह ज्यादातर समय बिस्तर पर बिताती थी और सपनों में विभिन्न रोमांच करना पसंद करती थी। लेकिन, उसके पसंदीदा सपनों में हमेशा नगर के लोग काम करते हुए दिखाई देते थे। यह देखकर उसने सोचा कि वह भी उस रोमांच में भाग लेना चाहती है, लेकिन जागने का मन नहीं होता था।
एक दिन, नगर के लोग एक बड़े त्योहार की तैयारी कर रहे थे। लेकिन, सोने वाली राजकुमारी इस बात को पूरी तरह भूल गई और फिर से सपनों में रोमांच का आनंद ले रही थी। नगर के लोग कह रहे थे, "अगर सोने वाली राजकुमारी जागकर हमारी मदद कर देती, तो यह और भी मजेदार होता।" सोने वाली राजकुमारी सपनों में उनकी आवाज़ नहीं सुन सकी, लेकिन उसने अपने दिल में उनकी उम्मीदों को महसूस किया।
सपनों में उसके सामने रंग-बिरंगी परियों ने प्रकट होकर कहा, "अगर तुम जाग नहीं जाओगी, तो नगर के लोग हमेशा काम करते रहेंगे। अपनी सुख के लिए, क्या तुम उनकी मदद नहीं करोगी?" सोने वाली राजकुमारी अचानक इस बात पर जाग गई। "सच है, अगर मैं जाग नहीं रही और सभी की मदद नहीं कर रही, तो यह अजीब है!" उसने निर्णय लिया।
तुरंत नगर में दौड़ती हुई सोने वाली राजकुमारी वहां पहुंची और सभी की मदद करने लगी। उसने मुस्कुराते हुए त्योहार की सजावट में मदद की, खाना बनाया और लोगों को उत्साहित किया। नगर के लोग भी एक होकर काम करने लगे और अंततः उन्होंने एक शानदार त्योहार का आयोजन करने में सफलता प्राप्त की। सोने वाली राजकुमारी ने "सोते हुए दूसरों को जगाना नहीं" कहावत का अर्थ अनुभव किया और खुद भाग लेकर वास्तव में मज़ा प्राप्त किया। तभी से, उसने सपनों के रोमांच के बराबर सच्चे रोमांच का आनंद लेना शुरू कर दिया।






































































































































































































