सारांश
एक दिन, शहर के छोटे से पूल में गांववाले इकट्ठा हुए और तैराकी प्रतियोगिता का आयोजन होने वाला था। तैराकी में माहिर जॉन ने आस-पास की उम्मीदों को अपने पर लेते हुए भाग लेने का निर्णय लिया। उसने अब तक कई प्रतियोगिताओं में जीत प्राप्त की थी और वह आत्मविश्वास से भरा हुआ था।
प्रतियोगिता के दिन, जॉन ने रंगीन तैराकी वस्त्र पहना और पूल के किनारे पर सबकी नजरें अपनी ओर खींची। "मेरे सामने कोई नहीं खड़ा हो सकता!" वह जोर से घोषणा करते हुए गर्म करने लगा, तभी पीछे से आवाज आई। "जरा, सावधान रहना चाहिए क्या?" यह स्थानीय तैराकी मास्टर, माइक था, जो आमतौर पर ज्यादा ध्यान आकर्षित नहीं करता था।
जॉन ने हंसते हुए जवाब दिया, "मेरी तैराकी देखो!" और जैसे ही старт का संकेत मिला, वह तुरंत पानी में कूद पड़ा। लेकिन, पूल की गहराई उसकी आशा से कम थी, और उसकी शानदार कूद ने बड़ा पानी का छिट्टा उड़ा दिया। कुछ ही क्षणों में, जॉन पानी की सतह पर दिखाई नहीं दिया। दर्शक घबरा कर पूल के किनारे इकट्ठा हो गए।
"मैं तो डूब नहीं सकता..." जॉन सोच रहा था, लेकिन संघर्ष करते-करते उसका आत्मविश्वास उसे कटु रूप से परेशान करने लगा। उसे तैराकी में इतनी महारत थी कि उसने पानी के खतरों को भुला दिया था। अंततः, गांववालों की चिंता को नकारते हुए, जब उसे पानी से बाहर निकाला गया, तो उसने मजाकिया अंदाज में हंसते हुए कहा, "आखिरकार, गहराई पर ध्यान देना चाहिए!" उस क्षण में, गांववाले उसकी निर्लज्जता को देखकर चकित रह गए और उसकी पीठ के पीछे फैले तूफानी समुद्र को याद किया। इस प्रकार "तैराकी का उस्ताद" ने "जो अच्छी तरह तैरता है वह डूबता है" का नैतिक पाठ गांव में छोड़ा।






































































































































































































