सारांश
अजीब बीज
बहुत समय पहले, एक छोटे से गाँव में, एक मजाकिया लड़का तारो住んで था। वह हमेशा मजाक करता और गाँव वालों को हंसाता था, लेकिन वास्तव में वह ज्यादा गंभीर नहीं था। एक दिन, उसने सुना कि "मनोरंजक बीज" होते हैं, और उसने तुरंत गाँव के खेत में उन बीजों को बोने का फैसला किया। हालांकि, तारो ने यह नहीं सोचा कि ये बीज किस प्रकार के पौधों में परिवर्तित होंगे, बस मजे पर ही ध्यान केंद्रित किया।
कुछ हफ्तों बाद, तारो के खेत में रंग-बिरंगे अजीब पौधे उगने लगे। उसमें तरबूज के आकार के फूल, उल्टे उगने वाले बैंगन, और यहाँ तक कि उड़ते हुए गोभी भी प्रकट हुए। यह देखकर वह जोर से हंस पड़ा। "मेरे खेत से निकले हुए कला के टुकड़े!" कहकर वह बहुत खुश हो गया। हालांकि, गाँव के लोग उत्सुक थे, लेकिन यह सोचने लगे कि क्या ये वाकई में स्वादिष्ट हैं।
तारो ने इन पौधों के लिए एक बड़ा आयोजन योजना बनाई। "अजीब सब्जी महोत्सव" का नाम देते हुए, उसने गाँव वालों को आमंत्रित किया और धूमधाम से इसे मनाया। उसने अपने द्वारा बोए गए बीजों से उगे अजीब फसलें दिखाई और अपने हाथ से बनाई हुई भोजन परोसी। लेकिन, उसने जो भी खाना बनाया, उसमें कोई खास बात नहीं थी, और कई आगंतुक तो एक कड़की चखने तक में झिझके।
आखिरकार, गाँव के लोगों ने तारो की मजाक का आनंद लिया और अजीब पकवानों का मजा लेना शुरू किया। और अंत में, उन्होंने "जो बोओगे वही काटोगे" नामक लोकोक्ति को याद करते हुए, तारो ने अपने द्वारा बनाए गए सामान की जिम्मेदारी लेना तय किया। उसने सभी के साथ मिलकर हंसते-हंसते मजेदार यादें बनाईं और अगले दिन बीज बोने की योजना बनानी शुरू की। तब से, तारो ने यह सोचना शुरू किया कि क्या बोना है, और गाँव के खेत को हमेशा रोशन किया।






































































































































































































