सारांश
एक छोटे से गाँव में, एक बहुत गरीब किसान रहता था। उसका नाम था तارو। तارو हर दिन खेत में काम करता, थोड़े से फसल उगाता और गाँव वालों के साथ मिलकर ज़िंदगी बिताता था। लेकिन, एक दिन, उसने एक अनपेक्षित चीज़ का अहसास किया। खेत की फसल अब बड़ी नहीं हो रही थी, और गाँव में खाद्य संकट गंभीर हो गया था।
भूख से परेशान गाँव वालों की ओर तаро ने कहा, "‘पतले से बड़ा कटोल पकड़ना बेहतर है’ यही है असली बात। अभी छोटे फसल के खत्म होने से बेहतर है कि हम बड़े कटोल पकड़ें!" गाँव वाले यह सुनकर मुस्कुराए, लेकिन तaro ने इसे गंभीरता से लिया। उसने यात्रा करने का निश्चय किया और गाँव के बाहर स्थित खाद के ढेर की ओर बढ़ा।
खाद के ढेर पर पहुँचकर, तaro ने हिम्मत जुटाते हुए उस खाद को अपने हाथ में लिया और चिल्लाया, "यही है गाँव का भविष्य!" लेकिन आस-पास के लोग उसे देखकर चकित हुए, फिर भी तaro के शब्दों से प्रभावित हुए। उसने कहा, "अगर इस खाद का इस्तेमाल किया जाए, तो खेत भी समृद्ध होगा!" इस पर गाँव वाले उसकी सुझाव मानने लगे और खाद को खेत में डालने का निर्णय लिया।
कुछ सप्ताह बाद, खेत अनगिनत फसलों से भर गया, और गाँव वाले तaro को धन्यवाद देने लगे। परिणामस्वरूप, तaro गाँव का उद्धारक बन गया और उसने "पतले से बड़ा कटोल पकड़ना बेहतर है" का पाठ साबित किया। लेकिन गाँव वालों ने मजाक में कहा, "अगली बार, कृपया गंदे कटोल को छूने से बचें!" लेकिन तaro मन में और अधिक खाद की खोज जारी रखता था।






































































































































































































