सारांश
दानव और अगले साल की भविष्यवाणी
एक गांव में, भविष्य को जानने की अद्भुत शक्ति रखने वाला एक वृद्ध व्यक्ति रहता था। हर साल, कई ग्रामीण उसके पास आते और अगले साल की घटनाओं के बारे में पूछते। लेकिन वृद्ध हमेशा यही कहता, "अगर मैं अगले साल की बात बताऊं, तो दानव हंसेंगे।" ग्रामीण उस बात को समझ जाते और बिना अपनी इच्छाएं बताये वापस लौट जाते। फिर भी, उनके दिलों में भविष्य को जानने की इच्छा बनी रहती थी।
लेकिन, एक साल की सर्दी में, एक युवा महिला गांव में आई। उसका नाम आया था। उसने कहा कि उसने एक विशेष सपना देखा है और अपने भविष्य की भविष्यवाणी के लिए वृद्ध से अनुरोध किया। वृद्ध उसकी जुनून से प्रभावित हुआ और अंततः कहा, "अगले साल की वसंत में, दानव गांव में आएंगे और बहुत फसल लाएंगे।" आया ने उन शब्दों पर विश्वास किया और गांव के लोगों को बताने का निर्णय लिया।
जब वसंत आया, ग्रामीणों ने आया के शब्दों पर विश्वास किया और फसल बोने की तैयारी शुरू की। लेकिन, दानव के आने का कोई संकेत नहीं था, जिससे ग्रामीण चिंतित होने लगे। तभी, आया ने सपने में दानव की छवि देखी। उसने कहा, "भविष्य लोग बनाते हैं," और ग्रामीणों को सहयोग करने की महत्वता सिखाई।
आखिरकार, आया ने ग्रामीणों को एकत्रित किया और सब मिलकर फसल बोने का काम किया। फिर, एक अजीब बात हुई, उस साल बहुत अच्छी फसल हुई, जैसे दानव हंसते हुए जश्न मना रहे हों। ग्रामीणों ने "दानव हंसते हैं" के अर्थ को समझा और महसूस किया कि भविष्य उनके अपने हाथों में है। और, अगले साल भी, उन्होंने भविष्य में उम्मीद के साथ मेहनत करने की कसम खाई।






































































































































































































