सारांश
दुर्भाग्य का स्रोत
बहुत समय पहले, एक छोटे से गांव में एक प्यारे बिल्ली "तमा" रहती थी। तमा को गांव वालों ने विशेष रूप से प्यार किया था और उसे हर दिन स्वादिष्ट मछली और दूध मिलता था। गांव के लोग जब तमा को देखते, तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती और वह समुदाय के केंद्र में थी।
एक दिन, तमा को गांव के चौक में हो रहे मेले में आमंत्रित किया गया। मेले में शानदार खाना और खेल होते थे, और पूरे गांव के लोग इकट्ठा होते थे। तमा गर्व से अपनी पूंछ को हिलाते हुए मेले का आनंद ले रही थी। गांव वालों ने उसके लिए विशेष मछली तैयार की थी और तमा भी बहुत खुश थी। अब तक सब कुछ सही चल रहा था, तमा को किसी समस्या का सामना नहीं करना चाहिए था।
लेकिन, जब मेले की रात खत्म हुई, तब गांव में बिजली गिरी और मूसलधार बारिश शुरू हो गई। तमा घर की ओर लौटते समय एक पेड़ के नीचे छिप गई, तभी पास के तालाब से गुस्से में भरे मेंढक आए। उन्होंने देखा कि तमा ने मेले में विशेष मछली खाई है, और जलन के कारण उन पर हमला करने का सोचा। तमा तेजी से भागने की कोशिश की, लेकिन बारिश के कारण फिसलन भरी जमीन में उसका पैर फिसल गया और वह गिर गई।
अगले दिन, तमा ने गांव वालों से मदद मांगी। जब गांव वालों ने उसका मेले में मजे करने का किस्सा सुना, तो उन्होंने कहा, "यही है, अच्छे के बाद बुरा आता है।" तमा ने भी समझा कि कभी-कभी बहुत अधिक मजे करने के उलटे नतीजे भी हो सकते हैं। और जब तमा सुरक्षित रूप से मदद पाई, तो उसने अपने सुख का अनुभव करते हुए, भविष्य में संयमित तरीके से मजेदार समय बिताने का फैसला किया।






































































































































































































