सारांश
धन कम तो दु:ख कम
बहुत समय पहले, एक छोटे से गाँव में "धनवाले" नाम का एक आदमी रहता था। वह अमीर नहीं था, लेकिन गाँव वालों द्वारा प्रिय था। धनवाले दिन भर गाँव के चौक पर विभिन्न ज्ञान बेचकर जीवन यापन करता था। उसका ज्ञान गाँव वालों की समस्याओं और कठिनाइयों को हल करने वाला था।
एक दिन, गाँव में एक धनी व्यापारी आया। व्यापारी गर्व से अपने अमीर जीवन के बारे में बताने लगा और सभी को आकृष्ट करने वाले रत्न और महंगे कपड़े प्रदर्शित किए। गाँव वाले उसकी सम्पन्नता देखकर हैरान थे, लेकिन धनवाले मुस्कुराते हुए बोला, "धन कम तो दु:ख कम।" गाँव वाले उसके कहने का मतलब समझ नहीं पाए और गड़बड़ाने लगे।
कुछ दिनों बाद, व्यापारी के शानदार घर में आग लग गई, और वह एक रात में अपनी सम्पत्ति खो बैठा। गाँव वाले चकित थे और व्यापारी की चिंता कर रहे थे। लेकिन, धनवाले ठंडे दिमाग से बोला, "देखो, अमीर के दु:ख का कोई मोल नहीं। लेकिन, मेरी तरह कम धन रखने वाले की फिक्र कम होती है और मन हल्का होता है।"
उसके बाद, व्यापारी गाँव छोड़कर चला गया, और धनवाले फिर से ज्ञान बेचने लगा। गाँव वालों को एहसास हुआ कि धन रखना हमेशा खुशी देने वाला नहीं होता, और वे धनवाले की शिक्षा को अपने दिल में संजोने लगे। इस तरह गाँव में, बहुत कम धन रखने वाले लेकिन खुश लोग बढ़ने लगे।






































































































































































































