सारांश
लोगों की मक्खियाँ हटाना
बहुत समय पहले, एक छोटे से गाँव में रहने वाले लोग हमेशा अपने जीवन की व्यस्तता का उल्लेख करते थे। गाँव के चौक पर, किसान, व्यापारी और कारीगर एकत्रित होते थे और एक-दूसरे की गलतियों और असफलताओं पर हंसते थे। लेकिन वे अपनी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते थे और केवल दूसरों की आलोचना करते रहते थे।
एक दिन, गाँव में एक अजीब यात्री आया। वह काले कपड़ों में लिपटा हुआ था और उसके चेहरे पर एक अदम्य मुस्कान थी। गाँव वालों ने उसे जोर से अपनी सफलताओं और दूसरों की असफलताओं के बारे में बताना शुरू किया। यात्री ने आँखें छोटी करते हुए मुस्कुराकर कहा, "लोगों की मक्खियाँ हटाना," और यह सुनते ही गाँव वाले चौंक गए। गाँववालों को उस शब्द का अर्थ नहीं समझ आया और उन्होंने इसे थोड़ी हल्की-फुल्की हंसी के तौर पर छोड़ दिया।
यात्री ने उस रात, जब गाँव वाले सोने चले गए, उनके घरों के चारों ओर मक्खियों का एक छत्ता बनाने का निश्चय किया। सुबह होते ही, गाँव वाले मक्खियों के हमले से घबराए और भागने लगे। मक्खियाँ जोर से buzz करती हुई उनके पीछे लगीं, और यह एक बुरे सपने की तरह था। गाँव वाले एक-दूसरे को दोष देते हुए अपनी अज्ञानता का एहसास कर रहे थे।
अंत में, गाँव वालों को एहसास हुआ कि यात्री ने उन्हें अपनी समस्याओं पर विचार करने का एक अवसर दिया था। मक्खियों के पीछा करने के बाद, वे आखिरकार अपने जीवन और मानव संबंधों पर ध्यान दे सके। और गाँव में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा। हंसी में, स्व-प्रतिबिंब का एक हिस्सा भी शामिल होने लगा, और गाँव वालों ने अब पहले की तरह केवल दूसरों की आलोचना करने के बजाय, एक साथ बढ़ने का रास्ता चुना। यही यात्री का अजीब सिखाने वाला पाठ बन गया।






































































































































































































