सारांश
चील और बाज का चमत्कार
बहुत समय पहले, पहाड़ की तलहटी में एक चील रहती थी। उसका नाम 'तоби' था, और उसे हमेशा आसमान में उड़ना बहुत पसंद था, लेकिन वह कभी ऊँचा नहीं उड़ती थी। इसका कारण यह था कि तobi अपने चील के रक्त को शर्मिंदगी महसूस करती थी। वह आसमान में उड़ने वाले अपने गुरु बाज की तरह बनना चाहती थी, लेकिन आसमान के ऊँचे स्थानों पर रहने वाले बाज अक्सर तobi का अपमान कर के उसे नीचा समझते थे।
एक दिन, तobi ने ठान लिया कि वह उस ऊँचे पहाड़ पर उड़ान भरेगी, जहाँ बाजों का एक झुंड इकट्ठा होता था। वहाँ सुंदर बाज इकट्ठा थे, और उन्होंने तobi को देखकर हंसना शुरू कर दिया। लेकिन तobi ने उनकी हंसी को अनसुना करते हुए चुनौती स्वीकार करने का फैसला किया। उसने चिल्लाकर कहा, "मैं एक चील हूँ, लेकिन हार नहीं मानूँगी!" और उसने चील की शक्ति का पूरा उपयोग किया। उसने एक ही बार में लंबी दूरी तय की और शानदार तरीके से आसमान में उड़ने में सफल रही।
उसकी इस उपस्थिति को देखकर बाज हैरान रह गए और धीरे-धीरे उसकी प्रशंसा करने लगे। उन्होंने चील के साहस और मेहनत को पहचाना और तobi को अपने साथी के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया। इसके बाद, तobi ने बाजों के साथ ऊँचा उड़ान भरा, और वह भी बाज की तरह आसमान में उड़ने लगी। उसके चारों ओर के लोग उसकी इज़्जत करने लगे और वह जल्द ही "चील की तobi" के रूप में जाना जाने लगी।
कुछ सालों बाद, तobi ने अपने प्यारे चूजों का पालन-पोषण करने का निर्णय लिया। वह चूजे, बिलकुल बाज की तरह खुशी से आसमान में उड़ने लगे और क्षण भर में ऊँचे पहाड़ों को पार कर गए। चारों ओर की चीलें उन्हें देखकर हैरान रह गईं और सबने कहना शुरू कर दिया कि "चील बाज को जन्म देती है"। तobi ने देखा कि उसका बच्चा उससे कहीं अधिक ऊँचा उड़ रहा है, और उसने अपने प्रयासों का फल पाकर गर्व महसूस किया। इस कहानी के माध्यम से, तobi ने अपनी साधारणता से असाधारण संतान विकसित करने में सफल हो गई।






































































































































































































