सारांश
एक गांव के ज्ञानी और साधारण चोर
बहुत समय पहले, एक छोटे से गांव में एक ज्ञानी रहते थे। वे अपनी बुद्धि से गांव के लोगों की मदद करते थे, लेकिन गांव में एक ऐसा चोर था, जो न तो आकर्षक था और न ही दिखाई देने वाला, फिर भी वह बहुत चालाक था। उस चोर का नाम डॉन था। वह कभी-कभी गांव वालों से भोजन और पैसे चुरा लेता था, लेकिन कोई भी उसके काम को नहीं पहचानता था।
एक दिन, गांव में एक बड़ा त्योहार मनाने का निर्णय हुआ। ज्ञानी ने गांव वालों से कहा कि वे त्योहार की तैयारियों में मदद करें। लेकिन डॉन ने उस त्योहार का उपयोग करके फिर से चोरी करने की योजना बनाई। "त्योहार के दौरान सभी लोग खुश होंगे। यह एक बेहतरीन मौका है!" सोचते हुए, डॉन ने पूरी तैयारी की।
हालांकि, ज्ञानी ने डॉन के मन की बातों को भांप लिया था। ज्ञानी ने जैसे कि किसी को देख लिया हो, डॉन के दिल के अंदर झांककर देखा और उसे पता था कि वह अभी चोरी करने की योजना बना रहा है। इसलिए, उन्होंने त्योहार के दिन डॉन को एक विशेष भूमिका दी। "अगर तुम त्योहार के मुख्य主持ता करते हो, तो सभी का आनंद बढ़ेगा।"
डॉन थोड़े भ्रमित थे, लेकिन उन्होंने ज्ञानी के शब्दों का पालन करने का निर्णय लिया। त्योहार के दिन, डॉन ने अपनी इच्छित चोरी को भुला दिया और गांव वालों की खुशी को देखने लगे। उस क्षण, उसके दिल में परिवर्तन आया। लोगों की मुस्कानों को देखकर, उसे एहसास हुआ कि उसकी हरकतें कितनी बेवकूफी थीं। और डॉन ने तय किया कि वह अब से लोगों को खुश करने का चयन करेगा और गांव के एक सदस्य के रूप में जीने का निर्णय लिया। इस तरह, ज्ञानी ने "मन की बातों को भांपने" की शक्ति का उपयोग करके डॉन को पुनर्जीवित करने में सफलता प्राप्त की।






































































































































































































