सारांश
नयनतारा की मुस्कान से जुड़े दिल
एक छोटे से गाँव में, एक अजीब शौक वाला एक बूढ़ा आदमी रहता था। उसका नाम जॉन था। वह हर दिन अपने घर के बगीचे में सुंदर फूल उगाने में बहुत मेहनत करता था, लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं था और हर रात उन फूलों का उपयोग करके गाँव के लोगों को हैरान करने में मज़ा लेने लगा। वह फूलों का उपयोग करके मृतकों की शृंगार व्यवस्था करता था, जिससे गाँव के लोग भयभीत हो जाते थे।
गाँव के लोग, शुरुआत में इसे "जॉन का सिर्फ एक मज़ाक" समझकर हंसते थे, लेकिन जैसे-जैसे उसकी निपुण व्यवस्थाएँ बढ़ती गईं, डर फैलने लगा। एक दिन, उसने "नयनतारा की मुस्कान" के नाम पर, अपने घर के सामने अपने काम को प्रदर्शित करने का निर्णय लिया। उसने फूलों से बनाए गए गुड़ियों को पंक्तिबद्ध किया, प्रत्येक पर चेहरा बनाया, और उनके अभिव्यक्ति को मानवीय बनाने की कोशिश की। गाँव के लोग इकट्ठा हुए, उनके भयावहता से कांपते हुए भी जिज्ञासा से देखा।
तभी जॉन ने अचानक, मुस्कुराते हुए, एक फूल निकालकर, शानदार ढंग से उस गुड़िया की ओर फेंक दिया। जैसे वह उससे बात कर रहा हो। उस पल, आस-पास अजीब सी चुप्पी छा गई। लोगों ने महसूस किया कि जॉन का यह कार्य "नयनतारा की मुस्कान" की तरह कुछ शब्दों से परे कुछ भेज रहा है। लेकिन उस पल में, जॉन की मंशा को समझने वाला कोई नहीं था।
कुछ दिनों बाद, गाँव में एक घातक हादसा हुआ। इसके कारण, जॉन द्वारा उगाए गए फूल पूरे गाँव में फैल गए, और गाँव वालों के दिलों में गहरा छाप छोड़ दिया। अब सभी ने समझना शुरू कर दिया कि उसकी नयनतारा की मुस्कान, भय नहीं, बल्कि कुछ सोचने वाली बात थी। गाँव अब उसके फूलों से घिरे मृतकों और उसके मज़ाकों की पूजा करने का स्थल बन गया था। और उसकी मुस्कान, डर के पीछे की सच्चाई को उजागर कर रही थी।






































































































































































































