सारांश
मिर्च का कौआ
एक समय की बात है, एक गाँव में काला कौआ, काला, बहुत अलग दिखने की इच्छा रखता था। वह हमेशा अपने काले पंखों से नाखुश रहता था और एक रंगीन रूप की तलाश में था। एक दिन, गाँव के चौक में लाल मिर्चों का ढेर देखकर काला ने एक मिर्च अपने सिर पर रख ली। तब गाँव के लोग उसे देखकर हंसने लगे, "ये है मिर्च वाला कौआ!"
काला शुरुआत में शर्मिंदा था, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपने नए लुक में आत्मविश्वास महसूस किया। उसने मिर्च पहनकर पूरे गाँव में उड़ान भरी और एक खास पहचान बना ली। आसपास के लोग भी उसे देखकर आनंदित होते थे, और गाँव के निवासी उसे "मिर्च का कौआ" कहने लगे।
एक दिन, जब एक यात्री गाँव में आया, उसने काला को देखकर हैरानी जताई। "कौआ मिर्च पहनकर क्यों है?" उसने पूछा। काला ने胸 को फुलाते हुए कहा, "मैं बाकी कौओं से अलग एक खास पहचान हूँ। काले रंग की परवाह नहीं, महत्वपूर्ण है कि मैं कितना आनंद ले रहा हूँ!" यात्री ने प्रभावित होकर कहा, "बिल्कुल सही! अपने आप पर गर्व करना महत्वपूर्ण है," और मुस्कुराया।
उस दिन के बाद, काला केवल काले कौआ के रूप में नहीं, बल्कि गाँव का लोकप्रिय चेहरा बन गया। बच्चे मिर्च की टोपी पहनकर उसकी नकल करते और चिल्लाते "हम काला की तरह बनना चाहते हैं!" काला ने गाँव में रंग और रूप से अधिक, आत्म-अभिव्यक्ति के महत्व की शिक्षा दी। और वह मिर्च पहनकर बंधन को मजबूत बनाते हुए एक दिल को छू लेने वाले कौआ के रूप में हमेशा के लिए याद रखा गया।






































































































































































































