सारांश
एक व्यापारी यात्रा के दौरान एक गाँव में रुकता है। वहाँ उसे एक भूखा लड़का मिलता है। व्यापारी ने अपने पास मौजूद थोड़े से रोटी का टुकड़ा लड़के को दे दिया। इस छोटे से अच्छे काम के कारण, लड़के ने अपनी जान बचाई। वह लड़का बाद में डॉक्टर बन गया और कई लोगों की जान बचाई। फिर एक दिन, व्यापारी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाता है। उसकी जान बचाने वाला वही लड़का था जिसे उसने पहले रोटी दी थी।
इससे सीखने को मिलता है कि, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, कोई भी अच्छे कर्म का प्रभाव कहीं न कहीं बड़ा हो जाता है और अंततः स्वयं के लिए अच्छे रूप में वापस आता है। अच्छे काम करना न केवल दूसरों की सहायता करता है, बल्कि यह अपने खुद के भविष्य पर भी अच्छे प्रभाव डाल सकता है। छोटे-छोटे दयालुता के कार्यों का संचय समाज के लिए बड़ी मूल्यवान चीज बन सकता है।

















































