सारांश
एक गांव में एक छोटी लड़की थी। वह हमेशा एक लाल हुड वाली चादर पहने रहती थी, इसलिए उसे "लाल टोपी" कहा जाता था। एक दिन, उसकी मां ने उसे अपनी दादी के पास कुछ मिठाई पहुँचाने के लिए कहा। रास्ते में, लाल टोपी को जंगल से गुजरना था, लेकिन उसकी मां ने उसे अंजान लोगों से बात न करने की चेतावनी दी थी।
जंगल में, लाल टोपी की मुलाकात एक चालाक भेड़िये से होती है। भेड़िया लाल टोपी से उसकी दादी के घर का पता पूछ लेता है और पहले दादी के घर की ओर बढ़ जाता है। वहां पहुँचकर, भेड़िये ने दादी को खा लिया और उसकी कपड़े पहनकर बिस्तर पर लेट गया।
लाल टोपी मासूमियत से दादी के घर पहुँचती है और बिस्तर में "दादी" को देखकर आश्चर्यचकित होती है। वह पूछती है, "आपकी आंखें इतनी बड़ी क्यों हैं?" तो भेड़िया जवाब देता है, "ताकि मैं तुम्हें अच्छी तरह से देख सकूँ।" फिर वह पूछती है, "आपके कान इतने बड़े क्यों हैं?" तो भेड़िया जवाब देता है, "ताकि मैं तुम्हारी आवाज अच्छी तरह सुन सकूँ।" और अंत में, जब वह पूछती है, "आपके दांत इतने बड़े क्यों हैं?" तो भेड़िया कहता है, "ताकि मैं तुम्हें खा सकूँ!" और डर के मारे, भेड़िया लाल टोपी को निगल जाता है।
लेकिन सौभाग्य से, एक शिकारी जो पास से गुजर रहा था, घर के अंदर घंटी की आवाज सुनता है। जब वह अंदर आता है, तो वह भेड़िये का पेट चीरकर लाल टोपी और उसकी दादी को बचा लेता है। वे सभी मिलकर भेड़िये से बाहर निकलते हैं और सुरक्षित अपने जीवन में लौट जाते हैं।
इस कहानी का नैतिक यह है कि अंजान लोगों के प्रति सतर्क रहना महत्वपूर्ण है। यह यह भी दर्शाता है कि कभी-कभी जिज्ञासा खतरे में डाल सकती है और माता-पिता की बातों को मानना कितना जरूरी है।



































